Aarthik vishamtayen

By: Sen, Amartya
Contributor(s): Bagla, Bhawanishankar [Translator]
Material type: TextTextPublisher: Delhi Rajpal 2015Description: 118 p. Includes indexISBN: 9788170283010Subject(s): Economic inequality | Welfare economics | Income distributionDDC classification: H 330.1556 Summary: नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रो. अमर्त्य सेन की जिन कुछ रचनाओं ने संसार में तहलका मचा दिया, उनमें से एक यह पुस्तक है । इंग्लैंड के वारविक विश्वविधालय में सातवें दशक के आरम्भ से दिए गए इन व्याख्यानों में उन्होंने जिस विचारधारा का प्रतिपादन किया, ओर जिसके आधार पर वाद के अनेक अर्थशास्त्रियों ने आगे बहुत काम किया, यह इस रचना में बीज रूप में प्रस्तुत है । इसमें दार्शनिक, सामाजिक, अर्थशास्त्रीय, गणितीय आदि सभी दृष्टियों से आर्थिक विषमता का विवेचन किया गया है और बहुत गहराई से उनकी छानबीन की गई है । सामूहिक चयन और समाज कल्याण की अर्थशास्त्रयों से प्रचलित विचारधाराओं को आर्थिक विषमता के व्यावहारिक क्षेत्र से जोड़कर उन्होंने पाती बार एक ऐसे ढाँचे का निर्माण किया है जिसके आधार पर मनुष्य जीवन की प्रमुख समस्या, गरीबी, से सही ढंग से निबटा जा सकता है । इस प्रक्रिया से उन्होंने कुछ प्रचलित विचारों को खारिज भी किया है और कुछ को स्वीकार करके उन पर आगे काम किया है । इस प्रक्रिया में उन्होंने कार्ल मार्क्स की साम्यवादी विचारधारा तथा चीनी साम्यवादी प्रयोग की "लम्बी छलाँग" और "सास्कृतिक क्रान्ति" की योजनाओं का रोचक विश्लेषण भी किया है ।
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Item type Current location Item location Collection Call number Status Date due Barcode
Hindi Books Vikram Sarabhai Library
Hindi
Slot 2531 (3 Floor, East Wing) Non-fiction H 330.1556 S3A2 (Browse shelf) Available 201304

The original book was published in the English language by Amartya Sen in 1973 as Economic Inequality

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रो. अमर्त्य सेन की जिन कुछ रचनाओं ने संसार में तहलका मचा दिया, उनमें से एक यह पुस्तक है । इंग्लैंड के वारविक विश्वविधालय में सातवें दशक के आरम्भ से दिए गए इन व्याख्यानों में उन्होंने जिस विचारधारा का प्रतिपादन किया, ओर जिसके आधार पर वाद के अनेक अर्थशास्त्रियों ने आगे बहुत काम किया, यह इस रचना में बीज रूप में प्रस्तुत है । इसमें दार्शनिक, सामाजिक, अर्थशास्त्रीय, गणितीय आदि सभी दृष्टियों से आर्थिक विषमता का विवेचन किया गया है और बहुत गहराई से उनकी छानबीन की गई है ।
सामूहिक चयन और समाज कल्याण की अर्थशास्त्रयों से प्रचलित विचारधाराओं को आर्थिक विषमता के व्यावहारिक क्षेत्र से जोड़कर उन्होंने पाती बार एक ऐसे ढाँचे का निर्माण किया है जिसके आधार पर मनुष्य जीवन की प्रमुख समस्या, गरीबी, से सही ढंग से निबटा जा सकता है । इस प्रक्रिया से उन्होंने कुछ प्रचलित विचारों को खारिज भी किया है और कुछ को स्वीकार करके उन पर आगे काम किया है । इस प्रक्रिया में उन्होंने कार्ल मार्क्स की साम्यवादी विचारधारा तथा चीनी साम्यवादी प्रयोग की "लम्बी छलाँग" और "सास्कृतिक क्रान्ति" की योजनाओं का रोचक विश्लेषण भी किया है ।

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