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Lehaza

By: Bhate, Rohini.
Contributor(s): Datye, Smita [Translator] | Adhye, Neelima [Translator] | Purohit, Sunita [Translator].
Material type: materialTypeLabelBookPublisher: New Delhi Rajkamal Prakashan 2018Description: 340p.ISBN: 9789388183307.Subject(s): Indian culture | Artistic culture | Indian heritage | Marathi-Hindi-literatureDDC classification: H 891.43 Summary: कलाओं में भारतीय आधुनिकता के एक मूर्धन्य सैयद हैदर रजा एक अथक और अनोखे चित्रकार तो थे ही उनकी अन्य कलाओं में भी गहरी दिलचस्पी थी | विशेषतः कविता और विचार में | वे हिंदी को अपनी मातृभाषा मानते थे और हालाँकि उनका फ्रेंच और अंग्रेजी का ज्ञान और उन पर अधिकार गहरा था, वे, फ़्रांस में साठ वर्ष बिताने के बाद भी, हिंदी में रमे रहे | यह आकस्मिक नहीं है कि अपने कला-जीवन के उत्तरार्द्ध में उनके सभी चित्रों के शीर्षक हिंदी में होते थे | वे संसार के श्रेष्ठ चित्रकारों में, २०-२१वीं सदियों में, शायद अकेले हैं जिन्होंने अपने सौ से अधिक चित्रों में देवनागरी में संस्कृत, हिंदी और उर्दू कविता में पंक्तियाँ अंकित कीं | बरसों तक मैं जब उनके साथ कुछ समय पेरिस में बिताने जाता था तो उनके इसरार पर अपने सात नवप्रकाशित हिंदी कविता की पुस्तकें ले जाता था : उनके पुस्तक-संग्रह में, जो अब दिल्ली स्थित रजा अभिलेखागार का एक हिस्सा है, हिंदी कविता का एक बड़ा संग्रह शामिल था | रजा की एक चिंता यह भी थी कि हिंदी में कई विषयों में अच्छी पुस्तकों की कमी है | विशेषतः कलाओं और विचार आदि को लेकर | वे चाहते थे कि हमें कुछ पहल करना चाहिये | २०१६ में साढ़े चौरानवे वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु के बाद रजा फाउंडेशन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हिंदी में कुछ नये किस्म की पुस्तकें प्रकाशित करने की पहल रजा पुस्तक माला के रूप में की है, जिनमे कुछ अप्राप्य पूर्व प्रकाशित पुस्तकों का पुनर्प्रकाशन भी शामिल है | उनमे गाँधी, संस्कृति-चिंतन, संवाद, भारतीय भाषाओँ से विशेषतः कला-चिंतन के हिंदी अनुवाद, कविता आदि की पुस्तकें शामिल की जा रही हैं | सभी पुस्तकों पर रजा साहब और उनके समकालीन मित्र चित्रकारों आदि की प्रतिकृतियाँ आवरणों पर होंगी | शास्त्रीय नृत्य-जगत में दशकों तक रोहिणी भाटे एक सुदीक्षित प्रयोगशील कथक नर्तकी, प्रसिद्द कथक-गुरु और कथक के विभिन्न पक्षों पर विचारशील आलोचक के रूप में सुप्रतिष्ठित थीं | उनके काम का विशेष महत्त्व इसलिए भी है कि उन्होंने विचार और प्रयोग के स्तर पर कथक को प्राचीन शास्त्र-परम्परा से जोड़कर उसमे नयी छाया और प्रासंगिकता उत्पन्न की | उनके समय-समय पर व्यक्त विचार, अनुभव और विश्लेषण 'लहजा' में एकत्र हैं और उन्हें हिंदी में प्रस्तुत कर नृत्यप्रेमी रसिकों और कथक जगत को एक अनूठा उपहार दिया जा रहा है | अशोक वाजपेयी https://www.rajkamalprakashan.com/default/lehaza
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Item type Current location Item location Collection Call number Status Date due Barcode
Hindi Books Vikram Sarabhai Library
Hindi
Slot 2556 (3 Floor, East Wing) Non-fiction H 891.43 B4L3 (Browse shelf) Available 199039

कलाओं में भारतीय आधुनिकता के एक मूर्धन्य सैयद हैदर रजा एक अथक और अनोखे चित्रकार तो थे ही उनकी अन्य कलाओं में भी गहरी दिलचस्पी थी | विशेषतः कविता और विचार में | वे हिंदी को अपनी मातृभाषा मानते थे और हालाँकि उनका फ्रेंच और अंग्रेजी का ज्ञान और उन पर अधिकार गहरा था, वे, फ़्रांस में साठ वर्ष बिताने के बाद भी, हिंदी में रमे रहे | यह आकस्मिक नहीं है कि अपने कला-जीवन के उत्तरार्द्ध में उनके सभी चित्रों के शीर्षक हिंदी में होते थे | वे संसार के श्रेष्ठ चित्रकारों में, २०-२१वीं सदियों में, शायद अकेले हैं जिन्होंने अपने सौ से अधिक चित्रों में देवनागरी में संस्कृत, हिंदी और उर्दू कविता में पंक्तियाँ अंकित कीं | बरसों तक मैं जब उनके साथ कुछ समय पेरिस में बिताने जाता था तो उनके इसरार पर अपने सात नवप्रकाशित हिंदी कविता की पुस्तकें ले जाता था : उनके पुस्तक-संग्रह में, जो अब दिल्ली स्थित रजा अभिलेखागार का एक हिस्सा है, हिंदी कविता का एक बड़ा संग्रह शामिल था | रजा की एक चिंता यह भी थी कि हिंदी में कई विषयों में अच्छी पुस्तकों की कमी है | विशेषतः कलाओं और विचार आदि को लेकर | वे चाहते थे कि हमें कुछ पहल करना चाहिये | २०१६ में साढ़े चौरानवे वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु के बाद रजा फाउंडेशन ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए हिंदी में कुछ नये किस्म की पुस्तकें प्रकाशित करने की पहल रजा पुस्तक माला के रूप में की है, जिनमे कुछ अप्राप्य पूर्व प्रकाशित पुस्तकों का पुनर्प्रकाशन भी शामिल है | उनमे गाँधी, संस्कृति-चिंतन, संवाद, भारतीय भाषाओँ से विशेषतः कला-चिंतन के हिंदी अनुवाद, कविता आदि की पुस्तकें शामिल की जा रही हैं | सभी पुस्तकों पर रजा साहब और उनके समकालीन मित्र चित्रकारों आदि की प्रतिकृतियाँ आवरणों पर होंगी | शास्त्रीय नृत्य-जगत में दशकों तक रोहिणी भाटे एक सुदीक्षित प्रयोगशील कथक नर्तकी, प्रसिद्द कथक-गुरु और कथक के विभिन्न पक्षों पर विचारशील आलोचक के रूप में सुप्रतिष्ठित थीं | उनके काम का विशेष महत्त्व इसलिए भी है कि उन्होंने विचार और प्रयोग के स्तर पर कथक को प्राचीन शास्त्र-परम्परा से जोड़कर उसमे नयी छाया और प्रासंगिकता उत्पन्न की | उनके समय-समय पर व्यक्त विचार, अनुभव और विश्लेषण 'लहजा' में एकत्र हैं और उन्हें हिंदी में प्रस्तुत कर नृत्यप्रेमी रसिकों और कथक जगत को एक अनूठा उपहार दिया जा रहा है | अशोक वाजपेयी


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